Thursday, September 20, 2007

एक क्षमा पर्व हमें भी मनाना चाहिये !

भगवान महावीर के अनुयाइयों द्वारा वर्ष में एक बार पर्युषण पर्व के रूप में एक अदभुत पर्व मनाया जाता है. मैं जैन नहीं लेकिन कई जैन परिवारों से मित्रता है. उनके कार्ड,एस.एम.एस.और फ़ोन आते हैं और हाँ अब ई-मेल भी आने लगे हैं जिसमें क्षमा की भावुक अभिव्यक्ति होती है. मुझे यह पर्व विशेष रूप से इसलिये अच्छा लगता है कि जाने-अनजाने हुए तमस,तनाव,क्रोध और त्रुटी के लिये एक मौका मिल जाता है हम अपने मित्रों और परिजनों से अपने द्वारा हुई त्रुटियों के लिये माफ़ी मांग लें. इस बार भी कई संदेश मिले जिनमें क्षमा का भाव व्यक्त था.

मुझे लगता है ब्लागर बिरादरी में भी इस तरह का क्षमा पर्व मनाना चाहिए . साल भर में एक बार मनाए जाने इस पर्व में दिल की सफ़ाई भी हो जाएगी और मन भी हल्का हो जाएगा.जो यह मानता है कि उससे कोई ग़लती हो ही नहीं सकती उसके लिये तो मेरे सुझाव फ़िजूल ही हैं लेकिन जो विनयशील हैं और संजीदगी से अपनी ग़लतियों का अहसास करते हैं उनका ध्यान नीचे लिखी बातों की ओर ले जाना चाहूंगा. निम्नांकित बातो के लिये हम ब्लाग बिरादरी से क्षमा मांग सकते हैं....

-किसी का ब्लाग पढ़ा ...अच्छा भी लगा लेकिन मैने ऐसा क्यों नहीं लिखा ऐसा ईर्ष्या भाव मन में आए तो क्षमा मांगना चाहिये.

- किसी को बताए बिना किसी की सामग्री का उपयोग किया ..ऐसा करने के लिये क्षमा मांगना चाहिये.

- किसी ने आपके लिखे की प्रशंसा की लेकिन आपने ई-मेल के ज़रिये या अपने ब्लाग पर टिप्प्णीकारों के प्रति साधुवाद नहीं प्रकट किया ...इस बात के लिये क्षमा प्रार्थना करना चाहिये.

- किसी के लिखे पर अर्नगल टिप्पणी की और उससे किसी का दिल दुखा और यदि हमें इस बात का भान बाद में भी आया है तो हमें उसके लिये विनम्रतापूर्वक मुआफ़ी मांग लेनी चाहिये.

हो सकता है मेरा सुझाव भावुकता भरा हो लेकिन ब्लागर बिरादरी में मेरे संपर्क में आए ऐसे कई संजीदा मित्र हैं जो मेरी इस बात को तवज्जो देंगे. इस काम के लिये किसी मुहूर्त , पंचांग और चोघडिये की ज़रूरत नहीं . मै स्वयं जाने अगजाने में हुई त्रुटी के लिये मेरी इस पोस्ट से आप सभी से करबध्द क्षमा याचना करता हूँ...हाल फ़िलहाल ऐसी कोई त्रुटी ध्यान तो नहीं आ रही लेकिन अवचेतन मन भी तो कई तरह की चोरी और अपराध करता है.अंग्रेज़ी में कहा भी तो है...चैरिटी बिगिन्स एट होम !.


(ब्लाग शब्द लिखते समय ब्ला के उपर चंद्र लगना चाहिये लेकिन ये कैसे होता है मुझे मालूम नहीं
विग्यापन में ग्य भी लिखना नहीं आता ...इसलिये कई बार इश्तिहार या एडवरटाइज़मेंट लिखता हूँ..ऐसा न कर पाने के लिये भी क्षमा करें..और हाँ कोई ब्लागर मित्र ऐसा कर पाना बता सकें तो बड़ी मेहरबानी...कृपया sanjaypatel1961@gmail.com पर एक ई-मेल भेजने की कृपा करें.

5 comments:

Udan Tashtari said...

उत्तम विचार. आपको ईमेल भेज दिया है.

उन्मुक्त said...

अच्छा विचार है।
माफी किसी खास बात के लिये होनी चाहिये - समान्य रूप से नहीं कि मुझे गलती के लिये माफ किया जाय। यदि उस बात का उल्लेख नहीं किया जाता है जिसके लिये माफी मांगी जा रही है तो गलत बात का बोध नहीं होता है और यह नहीं मांगने के बराबर है।
मैं लिनेक्स में काम करता हूं और ऍ, या ॅ या ऑ या ॉ का चिन्ह लगाना बहुत आसान है। SCIM में फोनेटिक की बोर्ड में यह शिफ्ट १,२,३, और ४ के साथ लगाया जात है। इसी प्रकार ज्ञ शिफ्ट ६ के साथ लिखा जाता है।

संजय बेंगाणी said...

पर्युषणपर्व पर कुछ ब्लॉगर पहले से क्षमायाचना करते रहे हैं. मगर अल्पसंख्यको पर ध्यान ही कौन देता है :)

पिछले साल ही मैने "मिच्छामी दुक्कडम" का अर्थ समझाया था.

आप हिन्दी लिखने के लिए कौन सा औजारा उपयोग में लेते है? अगर इंडिक आए एम ई का प्रयोग करते है तो ऑ के लिए सिफ्ट ओ की दबाएं, और ज्ञ के लिए सिफ्ट जी के बाद वाय की का प्रयोग करें.

वैसे मन, वचन और कर्म से आपको कोई ठेस पहूँचाई हो तो मुझे क्षमा करें. मिच्छामि दुक्कडम.

manish joshi said...

संजय जी आपके संचालन के तो सभी इंदौरी कायल हैं लेकिन आपका ब्ल़ॉग पहली बार देखा। दो-तीन लेख पढ़े और सभी अच्छे लगे। ब्‍लॉग कविता भी। सचमुच मजा आ गया.

Lavanyam - Antarman said...

Michami Dukkadam Sanjay Bhai !!
Deepak ( mere Pati ) bhee Jain hain .
Es saal bhee Deraser gaye the.

Ganpati Bappa Moriya !!
Jai Sree Krishna !!
&
Aap Jiyo Hazaron Saal , Saal ke Din hon ,
Pachas Hazaar on 22 nd of Sept. wich is your B- day !!
Enjoy your Special Day & Manny more ~~
Sa ~~ sneh,
Lavanya & Deepak