Wednesday, September 26, 2007

फ़ब्तियाँ कसने वाले भूल जाते हैं कि जीत दिलाने वाला एक मुसलमान भी है

ट्वेंटी 20 वर्ल्ड कप की जीत ने पूरे देश को उस रात उन्माद में भर दिया था. जश्न मने,पटाख़े फ़ूटे,नारे लगे...अच्छा लगा. लेकिन मेरे शहर में कुछ अति-उत्साही भी थे.मुसलमान बस्तियों के पास से गुज़रे और फ़ब्तियाँ कसने लगे. मानो जताना चाहते हों कि देखो आज मुसलमान हार गए. अरे भाई पाकिस्तान हार गया तो ऐसा कैसे समझ लें कि वही एक राष्ट्र है जो मुसलमानों की नुमाइंदगी करता है. बस मकसद इतना भर था कि ज़हर फ़ैले.हम भूल जाते हैं कि ऐसा कर के हम पूरी दुनिया को कौन सा अच्छा संदेश दे रहे हैं. फ़ब्तियों पर बात रूक जाती तो ठीक था. पत्थरबाज़ी पर बात आ गई...इधर से भी ...उधर से भी. ऐसा थोड़े ही है कि भारत जीत गया तो हिन्दू जीत गए. ये तय करने का हक़ हमें कौन सा संविधान देता है.



वक़्त रहते हमें इन छोटी मानसिकताओं से उबरना पड़ेगा. उस्ताद बिसमिल्लाह ख़ान साहब मुसलमान बाद में थे..सबसे पहले इस देश और उसकी तहज़ीब के नुमाइंदे थे. पं.रविशंकर हिन्दू बाद में हैं सबसे पहले भारत के सर्वकालिक महान सितारवादक हैं . जिस हिन्दू लता मंगेशकर को हम जानते हैं उन्होने नौशाद , गु़लाम मोहम्म्द, सज्जाद हुसैन,ख़ैयाम के संगीतबध्द और शकील बदायूँनी,मजरूह सुल्तानपुरी,राजा मेहंदी अली ख़ाँ,साहिर लुधियानपुरी,हसरत जयपुरी जैसे मुसलमान गीतकारों के साथ गाये है. मन रे तू काहे न धीर धरे,वृंदावन का कृष्ण कन्हैया सबकी आँखों का तारा,मन तरपत हरि दरशन को आज,बड़ी देर भई , कब लोगे ख़बर मोरे राम जैसे भक्ति पद मुसलमान मोहम्मद रफ़ी से बेहतर कौन हिन्दू गा सकता था. उस्ताद विलायत ख़ाँ के साथ पं.किशन महाराज तबला संगति देते है और पं हरिप्रसाद चौरसिया के साथ उस्ताद ज़ाकिर हुसैन जैसा महान तबलानवाज़ छा जाता है. कैसी अदभुत गंगा जमनी तहज़ीब है हमारी जो सारी मान्यताओं को आत्मसात करती है.



ये सारे उदाहरण साबित करते हैं कि हमारी धर्म-निरपेक्ष छवि ही भारत की पहचान है. दुनिया अचरज करती है कि कैसे जुदा जुदा धर्म ओ मज़हब यहाँ साथ साथ रह लेते हैं. कैसे इस देश मीरा,गोरख,ग़ालिब,मीर,नज़ीर अकबराबादी,तुलसीदास,कबीर का निबाह एक साथ हो जाता है.



मैं यह नहीं कहता कि फ़िज़ाँ बिगाड़ने वाले एक ही तरफ़ हैं.दोनो मुहानो पर मौक़े को भुनाने वाले लोग हैं लेकिन एक नये सोच के साथ सभी को आगे आना होगा. दुनिया करवट ले रही है जनाब..बड़ी उम्मीद से भारत की ओर पूरा विश्व देख रहा है. साठ साल पहले बँटे थे....फ़िर भी जैसे तैसे चल गये....अब बँटे तो कहीं के नहीं रहेंगे.



ट्वेंटी 20 विश्व कप में जीत दिलाने वाले सिर्फ़ महेंद्रसिंह धोनी या युवराज अकेले नहीं ...मत भूलिये फ़ायनल में आपको महत्वपूर्ण विकेट दिलाने वाला खिलाड़ी इरफ़ान पठान है जो एक सच्चा मुसलमान है जो सामने वाली टीम को सिर्फ़ और सिर्फ़ अपना प्रतिद्वंदी मान कर अपना 100% प्रदर्शन दे रहा है और तीन महत्वपूर्ण विकेट्स लेकर मैन आँफ़ द मैच बन रहा है.थूँक डालनी चाहिये हमें ये नफ़रत.होना तो ये चाहिए कि हम हिन्दू भाई मुसलमान बस्तियों में जाकर इरफ़ान पठान ज़िन्दाबाद ! के नारे बुलंद करें और साबित करें कि हम कितने सह्र्दय हैं...ज़ोर ज़ोर से चिल्लाएँ धोनी तुम्हारा है...इरफ़ान हमारा है ये सब हैं भारत माता के लाल....इन्होने मान बढ़ाया है पूरी खिलाड़ी बिरादरी का. अब भी समय है हम चेतें....ऐसे मंज़र बनने लगे तो फ़िरक़ापरस्ती के लिये कोई जगह नहीं रह जाएगी दोस्तो.खेल,संगीत,कविता और साहित्य इस महान देश को जोड़ कर ही दम लें तो ठीक है वरना इसकी विरासत अपने पर आँसू बहाती नज़र आएगी.

11 comments:

Udan Tashtari said...

सही कह रहे हैं:

वक़्त रहते हमें इन छोटी मानसिकताओं से उबरना पड़ेगा.

चंद मौकापरस्त लोगों की वजह से और चंद विघ्नसंतोषियों का प्रभाव पूरा महौल बिगाड़ कर रख देता है. बहुत दुख की बात है.

yunus said...

सवाल धर्म का नहीं है । बल्कि सवाल जुनून और समर्पण का है । जो लोग इन चीज़ों को धर्म के चश्‍मे से देखते हैं
उनके बारे में क्‍या कहा जाए ।

जोगलिखी संजय पटेल की said...

समीरभाई और युनूस भाई;
ज़रा सोचिये वह नज़ारा जिसमें पूरा शहर जश्न में डूबा हुआ था और चंद बस्तियाँ दहशत में रात काट रहीं थीं.

vimal verma said...

संजयजी इस तरह के लोग दीमक की तरह हैं जो समाज को अन्दर ही अन्दर खाये जा रहे हैं..पर दिक्कत भी यही है कि जैसे जैसे समाज विकास कर रहा है इन लम्पटों की संख्या भी बढ्ती जा रही है इनके पास खुराफ़ात के अलावा और कुछ सोंचने को है भी नही..आगे आने वाले समय में ऐसी हरकत को रोका नही गया तो तो ये कुछ भी करते रहेंगे.. कोई इन्हें रोक नही पायेगा.. करना तो यही चाहिये ऐसी हरकत का विरोध आपके पास जो भी मंच उपलब्ध हो, जवाब तुरत देना चाहिये जैसा कि आपने किया.. आपने अच्छा लिखा शुक्रिया

प्रतीक शर्मा said...

Sanjay ji aap HIndi transliterator kee Width thodi see kam kariye jisse wo Fised size kaa ho jaaega .
waise aapkaa Blog par aa kar bohut accha lagathaa hain aap Niyamit isme likhate rahate hain aur updates dete rahate hain .Adsense bhee daalane kii koshish kariye to wur accha rahega

जोगलिखी संजय पटेल की said...

ज़रूर प्रतीक भाई...आपका मशवरा थोड़ा तकनीकी है मेरे लिये.मेरे मोबाइल 98268-26881 एक समस कर दीजिये जिससे मै आपसे बतियाते हुए आपकी राय का लाभ ले सकूँ.साधुवाद आपका और विमल भाई का भी.

मालवी जाजम said...

संजय ;
तुम्हारा आलेख मन को छूता है.
क्या ही अच्छा हो कि श्री नरेन्द्र मोदी गुजरात निवासी इरफ़ान पठान और युसूफ़ पठान के घर जाकर उनके अभिभावकों का इस्तेकबाल करें.ऐसी अभिव्यक्तियों से ही साबित होगी हमारी सच्ची भारतीयता.
नरहरि पटेल

Sanjeet Tripathi said...

सही कहा आपने !! कुछेक शहरों के कुछ इलाकों मे यह खबर पढ़ने को मिली, पढ़कर अफ़सोस हुआ

संजय बेंगाणी said...

हमने इससे उलट सुना. जश्न मनाते लोगो पर पत्थरबाजी हुई.

बाकी यह जीत सारी टीम की जीत है, भारत की जीत. इसे धर्म, प्रांत और जाती के आधार पर तोलना बेवकुफी है. भारत का आम जनमानस धर्मनिरपेक्ष है, भारतीय टीम भी.

पाकिस्तानी कप्तान द्वारा मुस्लमानों से माफी माँगना जरूर जहर घोलता सा लगा.

Manish said...

ऍसे लोग चाहे जिस तरफ हों जीत का ज़ायका बिगाड़ देते हैं।

पुनीत ओमर said...

क्षमा चाहता हूँ, मैं आपके विचारों और आपके प्रयासों को कम करके नहीं आँक रहा पर मेरे अनुभव से इस तरह के सारे फ़सादों की जड़ यही हद से ज्यादा "सेकुलरिज्म" है जिसमें अपने को कम बताकर दूसरे के गुणगान किये जाते हैं। एसे ही लोग अच्छे भले राजनीति से सर्वथा अनजान भोले कलाकारों को भी हिन्दू मुस्लिम में बाँट देते हैं।
सच कहूँ तो मुझे आज ही पता चला कि रफ़ी साहब मुसलमान थे। कभी एक महान गायक और संगीत के उपासक से ज्यादा कुछ उनके बारे में ना सोचा ना जानना चाहा।