Monday, December 31, 2007

कैलेण्डर की मुस्कुराहट के लिये !


साल तो बीतेगा ही

दिन,हफ़्ते और घंटे भी


कोशिश करें की न बीते मनुष्यता,

जज़बात,भावनाएँ और संवेदनशीलता


कहने को एक तारीख़

आएगी नई सी


लेकिन मैं जानता हूँ कि

कोई रूपांतरण न कर पाएगी बेचारी


कितनी बेबस है न तारीख़

उससे मनुष्य चलता है

ऐसा वह सोचती है

लेकिन मनुष्य चलाने लगा है अब उसे


कैलेण्डर में बीतती तारीख़ से कोई सबक़ नही लेता

कि हम भी तो बीत रहे हैं इसके साथ


सबके लिये यह जोड़ - घटाव का

सिलसिला जो ठहरा


जानते नहीं कि हम जोड़ने में

कितना घट गए हैं


कितने छोटे हो गए हैं

यह छोटापन कुछ कम कर सकें

तो शायद हम पर

नये साल का कैलेण्डर मुस्कुराने लगे

15 comments:

Aflatoon said...

साल मुबारक

ज्ञानदत्त पाण्डेय । GD Pandey said...

चलिये - जोड़ना-घटाना छोडें। नये साल में गुणा सीखें - प्रसन्नता और समृद्धि का गुणा।
नव वर्ष आपका मार्ग प्रशस्त करे - मंगलमय हो!

इरफ़ान said...

नए साल में आप और भी अधिक ऊर्जा और कल्पनाशीलता के साथ ब्लॉगलेखन में जुटें, शुभकामनाएँ.

www.tooteehueebikhreehuee.blogspot.com
ramrotiaaloo@gmail.com

Sanjeet Tripathi said...

शुभकामनाएं आपको भी नए साल की!!

अजित वडनेरकर said...

मंगलमय हो नववर्ष

Sanjay said...

नए साल की ढेरों शुभकामनाएँ संजय जी.

Dard Hindustani (पंकज अवधिया) said...

आपको नव-वर्ष की हार्दिक शुभकामनाए।

आपका जीवन खुशियो से भर जाए।

विनीत उत्पल said...

नया वर्ष आपके लिए शुभ और मंगलमय हो।

मीनाक्षी said...

नए वर्ष पर हार्दिक शुभकामनाएँ..

Lavanyam - Antarman said...

नए साल की शुभकामनाएं आपको भी।
-- Lavanya & Family

जोगलिखी संजय पटेल की said...

अपनेपन,उर्जा,सकारात्मक सोच,प्रसन्नता और पर्यावरण बोध के साथ आप सबके लिये दुआ करता हूँ कि नये वर्ष की प्रथम भोर मंगलमय हो.

हर्षवर्धन said...

नया साल मुबारक। इस साल जरा लिखने की निरंतरता बढ़ाइए।
http://www.batangad.blogspot.com/

vimal verma said...

बहुत सही संजय भाई, ऐसे ही लिखते रहें, हमारी शुभकामनाएं !!!

Arun Aditya said...

नये साल का कैलेण्डर मुस्कुराए. नव वर्ष मंगलमय हो!

Raviratlami said...

संजय जी / नरहरि जी,
अरविंद कुमार जी (हिन्दी कोश वाले) को मालवी साहित्यकारों व बुद्धिजीवियों के संपर्क सूत्र चाहिए - वे हिन्दी की 48 भाषाओं के कोश तैयार करने में केंद्रीय हिन्दी संस्थान आगरा का मार्गदर्शन कर रहे हैं. उन्होंने मालवी जाजम पर एक टिप्पणी भी छोड़ी है. कृपया उनसे संपर्क करें.