Wednesday, August 8, 2007

बामुलाहिज़ा होशियार...महान राष्ट्रीय प्रसंगों के लिये नेताजी तैयार

आपके हमारे लिये स्वतंत्रता दिवस की 60 वी वर्षगाँठ और प्रथम स्वातंत्र्य संग्राम के 150 वर्ष पूर्ण होना अपने आप में जीवन की किसी पूरी साध पूरी होने से कम नहीं है। लेकिन एक और प्राणी है जो इस पुण्य प्रसंग के नज़दीक आने से विशेष रूप से प्रसन्न है। वे हैं हमारे नेताजी...वे अभी से इस उत्सव को भुनाने की मानसिक तैयारी किये बैठे हैं. वैसे समय भी तो कर रह गया है.काम कितने सारे करना है.


सबसे पहले तो उन्होने अपने ड्रेस डिज़ाइनर को काम पर लगा दिया है कि वह जल्द से जल्द उनके लिये सादे मगर ड्रेस डिज़ाइनर कुर्ते पज़ामे तैयार कर रखे.अपने सेकेट्री को ताकीद भी कर दिया है कि भले ही ये कहने को ड्रेस डिज़ाइनर हो गए हों पर समय की फ़ितरत तो वही अपने टेलर माड़्साब वाली है सो फ़ैब इण्डिया से भी चार पाँच रेडीमेड जोड़ी भी लाकर तैयार रखे.



नेताजी ने अपने इवेंट मैनेजर को इस काम पर लगा रखा है कि वह तलाशे कि कौन कौन से प्रीमियम आयोजक हैं जो अपने आयोजनों में भीड़ और मीडिया का लाजवाब जमघट कर लेते हैं। नेताजी चाहते हैं ऐतिहासिक होने जा रहे प्रसंग का अपना महत्व है और सारा देश इसका ध्यानपूर्वक नोटिस लेने वाला है. पार्टी हाइकमान भी नज़र रखे कि है कि किस कार्यकर्ता ने अपने आपको इन आयोजनों में सक्रिय रखा है. तो इवेंट मैनेजर इज़ आँल सैट ...फ़ेहरिस्त लगभग तैयार है कि नेताजी कहाँ-कहाँ जाने वाले हैं.


नेताजी ने समय रहते एक दक्ष फ़ोटोग्राफ़र भी बुक कर लिया है क्योंकि मालूम है कि ऐन वक़्त पर ये धोका देगा और पैसा भी ज़्यादा लेगा.नख़रा करेगा सो अलग.उसे अभी से एक लम्बी मीटिंग कर के समझा दिया गया है कि वह किस किस एंगल का ध्यान रखे और किस किस हाईप्रोफ़ाइल नेता के तस्वीरें ले....विशेष रूप से ये भी बता दिया गया है कि जिन आयोजनों में फ़िल्म स्टार शिरकत करने वाले हैं उनमें फ़ोटो अविस्मरणीय आना चाहिये ..स्पेशली तारिकाओं के साथ।

नेताजी की बिटिया पिताश्री की बाँडी लैंग्वेज पर काम कर रही है। बता रही है कि आप इन दिनों बस मुस्कुराते तब तो ज़्यादा ही जब पार्टी के बड़े नेता कार्यक्रमों में मौजूद हों . बिटिया ने ये भी बताया है और टिप दी है कि विपक्ष के नेता की मौजूदगी में तनाव लाने की ज़रूरत नहीं है. बल्कि उस समय तो ज़्यादा खु़शनुमा माहौल क्रिएट कीजिये डैड..इस मामले मे नेताजी को लालूजी को रोल-माँडल बनाने की सीख भी दी है बॆटी ने.


नेताजी की टास्कफ़ोर्स ने मीडिया मैनेजमेंट पर विशेष सतर्कता बरती है इस बार.मीडियाकर्मियों को आयोजन तक आने-जाने और आयोजनों को बेहतर और इत्मीनान से कवर करने के लिये वाहन,लैपटाँप और कालांतर में आ रहे त्योहारों के लिये स्पेशल गिफ़्ट वाउचर्स का इन्तज़ाम अभी से कर दिया है. मीडिया को बता दिया गया है कि यह राष्ट्रीय पर्व अपनी जगह है लेकिन असली टारगेट हैं आनेवाले चुनाव.आज़ादी की साठवीं और प्रथम स्वातंत्र्य पर्व की डेढ़ सौं वीं जयंती सब चोचले हैं भावनात्मक रूप से भारतीय जनमानस को भुनाने के..मुद्दा इतना भर है कि इस बडे़ इवेंट के ज़रिये नेताजी की साख और प्रोफ़ाइल में इज़ाफ़ा होना चाहिये.


झण्डे,डंडे,तिरंगे,बैनर,बैजेज़,पोस्टर्स,होर्डिंग्स,टीवी एड्स,इंटरव्यूज़,बुकलेटस की आकर्षक छपाई और उसके वितरण के प्रबंध को समझदार लोगों को सौंपा गया है जिससे कुछ इस तरह की बात बने कि रानी लक्ष्मीबाई,तात्या टोपे,भगतसिंह,सरदार पटेल या आज़ाद से बड़ा योगदान नेताजी का दिखाई दे।निष्णांत और नामचीन इश्तिहार प्रबंध एजेंसी को सारा काम दिया गया है कि वह अपने हुनर का ध्यान रखते हुए बस इस इवेट मे जान डाल दे.लोग भूल जाएं कि अमर सेनानी कौन जो कुछ हो रहा है ..या होने वाला है वह नेताजी के कर-कमलों से ही संभव है..वे ही हैं सुनहरे भविष्य के कर्णधार.


भाषणों की तैयारी के लिये एक राष्ट्रीय ख्याति के साहित्यकार और कवि को इंगेज कर लिया गया है। ये श्रीमान भी खादी पहनते हैं और फ़ाइव स्टार होटलों में विचरते है... और जैसा चाहिये वैसा भाषण नेताजी के लिये मौके और दस्तूर को मन मस्तिष्क में रखते हुए रचते। हैं ...इलाक़ा,श्रोता और आयोजन का प्रोफ़ाइल देखकर भाषा रचना करने में इनका कोई सानी नहीं कविराज ने अपना काम लगभग पूरा कर लिया ..और आजकल नेताजी की स्कूलिंग कर रहे हैं कि किस जगह कौन सा शब्द किस वज़न के साथ बोला जाना चाहिये.


नेताजी के भाषणों के दस्तावेज़ीकरण के लिये एक अलग टीम बनाई गई है जिसमें दो वीडियोग्राफ़र और दो आँडियो रेकाँर्डिंग करने वाले एक्सपर्ट्स हैं।सारे भाषणों को अविकल रेकाँर्ड करने का निर्देश जारी किया गया है. बाद में सक्षम एडीटर की मदद लेकर एक सीडी जारी करने का मानस बना है जिसे अंतत: चुनाव में इस्तेमाल किया जा सके.


तैयारियाँ पूरी है ..जोश पूरा है और पूरी तरह से नेताजी तैयार हैं. बस ऐतिहासिक तथ्यों ,तिथियों और महापुरूषों के नाम आदि को याद करने में थोड़ा वक़्त लग रहा है.आपसे निवेदन है कि यदि आपके मोहल्ले , काँलोनी,नगर या कार्यालय में स्वाधीनता दिवस की साठवीं वर्षगाँठ और प्रथम स्वातंत्र्य संग्राम को लेकर किसी आयोजन की भावभूमि बन रही हो तो कृपापूर्वक मुझे सूचित करें (हाँ हाँ बंदे ने भी नेताजी को प्रमोट करने की फ़ेंचाइज़ी ले ली है..आप भी इंटरेस्टेड हैं क्या ?) आपसी समझबूझ से नेताजी को आपके यहाँ ले आएंगे जनाब...देखिये तो सही एक प्रोफ़ेशनली मैनेज्ड नेता को राष्ट्रीय कलेवर और मूड के आयोजन में बुलाने का क्या मज़ा है.आप तो मेरे ब्लाँग पर टिप्पणी लिख दें ..मै समझ जाऊंगा कि आपसे संपर्क करना है.

4 comments:

अरुण said...

अरे आप कहा फ़स कर कागज काले लाल पीले कर रहे है,छोडिये जे सब ,आप हमारा इंवेंट मनेज करे ,हम इस लाईन मे आपकी प्रतिभा देखवा चुके है. फ़ौरन आ जाये ..

Shastri JC Philip said...

चिंतन के लिये प्रेरित किया इस लेख ने -- शास्त्री जे सी फिलिप

हिन्दी ही हिन्दुस्तान को एक सूत्र में पिरो सकती है
http://www.Sarathi.info

Sanjeet Tripathi said...

सही!!

Udan Tashtari said...

बढ़िया है. विचारणीय.