Monday, May 12, 2008

अनुपम मिश्र के संपादन में गाँधी शांति प्रतिष्ठान की पत्रिका : गाँधी मार्ग


ख्यात पर्यावरणविद अनुपम मिश्र का नाम पढ़ने - लिखने वालों की दुनिया
में अनजाना नहीं है. अपनी क़लम और पर्यावरण कर्म से वे पूरे देश में
बहुत आदर के पात्र हैं। गाँधी शांति प्रतिष्ठान के तत्वावधान में अनुपम जी
ने गाँधी मार्ग नाम की पत्रिका का संपादन सम्हाला है. चिकने - रंगीन और
चमचमाते इस दौर में गाँधी मार्ग का कलेवर अत्यंत सादा और
सात्विक है. गाँधी और उनकी दृष्टि से मेल खाती विचारधारा को ये पत्रिका
अपने में समेटे है.इसे पढ़ें तो एक प्रतिबध्दता भी नज़र आती है विचारों की
और उन सब बातों की जो आमतौर पर मीडिया ख़ारिज कर रहा है.
पित्ज़ा-बर्गर हो रहे समय में गाँधी मार्ग घर का दलिया है जिससे
आपका हाज़मा क़तई नहीं बिगड़ता. गाँधी मार्ग का ले-आउट नितांत सर्वोदयी है
जिसका श्रेय जाने-माने कलाकार दिलीप चिंचालकर के खाते में जाता है.
रचनाओं का चयन अनुपमजी बड़ी सूझबूझ से कर रहे हैं और
उनके प्रयत्न रंग ला रहे हैं और गाँधी मार्ग के प्रसार में लगातार इज़ाफ़ा हो रहा है.

गाँधी मार्ग का ताज़ा यानी मई-जून -०८ अंक ताल्सताय और विनोबा जैसे
मनीषियों का लेखन समेटे है. गाँधी दर्शन और चिंतन अब वैश्विक ज़रूरत
बनता जा रहा है और बापू की प्रासंगिकता लगातार बढ़ रही है
ऐसे में गाँधी मार्ग का हर दो महीने में आप की द्वार-देहरी पर
आ जाना बहुत ही सुकून और सुख देता है.

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गाँधी मार्ग के ताज़ा अंक से ये सुविचार


एक लाख की कार : दो कौड़ी का विचार

औद्योगिक क्रांति के बाद विकास के जिस रास्ते पर दुनिया चली है,
उसने दो ऐसे संकट हमारे सामने खड़े कर दिये हैं,जिनका हल कोई
बता नहीं पा रहा है ; एक तरफ़ विकास के इस दानव का पेट भरने
के लिये अब हमारे पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं , दूसरी तरफ़ इस
विकास के स्वर्ग में हम सुखी, स्वस्थ और सार्थक जीवन जी सकें,
ऐसी स्थिति नहीं रह गई है. संसाधन नहीं हैं कि यह दानव ज़्यादा
जी सकेगा और पर्यावरण नहीं है कि हम ज़्यादा जी सकेंगे।
दो मौतों के बीच का यह संधिकाल है.
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और अब गाँधी मार्ग प्राप्त करने के लिये कुछ जानकारी भी देता चलूँ.....

गाँधी मार्ग : वार्षिक शुल्क : भारत में रूपये 100/-
दो वर्ष का रूपये: 190/-
आजीवन :रूपये : 500/-
शुल्क ड्राफ़्ट या मनीआर्डर द्वारा यहाँ भेजा जा सकता है:
गाँधी शांति प्रतिष्ठान,223 दीनदयाल उपाध्याय मार्ग नई दिल्ली 110 002

3 comments:

pritima vats said...

अनुपम मिश्र जी और उनके गांधी मार्ग के बारे में कमेंट करने से पहले उनके विशाल व्यक्तित्व के बारे में बहुत गहराई से जानने की जरूरत है। मैं जितना जान पाई हूं, उससे इतना ही कहूंगी कि बहुत आदर करती हूं उनका और गांधी मार्ग का भी। ब्लाग में उनको पढ़ना बहुत हीं अच्छा लगा।

छत्तीसगढिया .. Sanjeeva Tiwari said...

आदरणीय गांधी मार्ग के संबंध में यहां लिखने के लिये धन्यवाद । प्रीतिमा जी ने सहीं कहा है अनुपम जी के संबंध में । मैंनें इस पर जनवरी में एक पोस्ट लिखी थी हमारी हिन्दी का भी कल्याण हो ! रूपर्ट स्नेल इस पर पुन: लिखने एवं सुधी पाठकों तक इसे पहुंचाने के लिये साधुवाद ।

हर्षवर्धन said...

ऐसी जानकारी ज्यादा लोगों तक पहुंचनी चाहिए।