Showing posts with label अहमद कमाल परवाज़ी. Show all posts
Showing posts with label अहमद कमाल परवाज़ी. Show all posts

Sunday, March 9, 2008

ऊर्दू शायरी परिदृष्य से अनायास ओझल हो जाना एक सितारे का !

दोस्तो...,मध्य-प्रदेश के पौराणिक शहर उज्जैन के शायर थे भाई अहमद कमाल परवाज़ी.विगत दिनो उनका इंतेक़ाल हो गया. साठ के आसपास के थे और बैंक मेंनौकरी किया करते थे. विगत दस - पन्द्रह बरसों में जो नाम म.प्र. केशायरी के परिदृष्य पर उभर कर आए हैं उनमें कमाल भाई वाक़ई कमाल के थे.जुदा अंदाज़ और लाजवाब कहन के उस्ताद अहमद कमाल परवाज़ी ने थोड़े हीसमय में मंच और अदब की दुनिया में एक आदरणीय मुकाम हासिल कर लिया था.आज मुशायरों में जिस तरह से फ़िरक़ापरस्ती की बात की जा रही है वे उससे ख़ासीदूरी रखते थे और ऊर्दू की ईमानदार ख़िदमत को इबादत का दर्जा देते थे.अहमद कमाल परवाज़ी के जाने से ग़ज़ल के मेयार से एक दमदार आवाज़ गुमहो गई है.उन्हें ख़िराजे अक़ीदत पेश करते हुए अपने संकलने से उनके अशआर आपकेलिये पेश कर रहा हूँ .....मुझे यक़ीन है कि उनका क़लाम पढ़कर आपखु़द ब ख़ुद इस बात का अंदाज़ा लगा लेंगे कि हमने किस पाये का शायर खोया है.

उनकी एक ग़ज़ल के दो शे'र:

छत पे सूरज को बुझाने के लिये मत आना
छत पे सूरज को बुझाने के लिये मत आना

मैं तो तेरे ही तसव्वुर की महक में गुम हूँ
तू मेरा ध्यान बँटाने के लिये मत आना

ये रंग देखिये.......

एक ही तीर है तरकश में तो उजलत न करो
ऐसे वक़्तों में निशाना भी ग़लत लगता है

(उजलत: जल्दबाज़ी)

एक ग़ज़ल के दो शे'र कुछ यूँ हैं.....

कहर गुज़रा तो अज़ाब आएंगे
नींद आई तो ख़्वाब आएंगे

क़त्ल कर देंगी नेकियाँ इक दिन
ख़ून पीने सवाब आएंगे

और ये अंदाज़ देखें कमाल भाई का.....

वो साफ़ बोलने वालों की जान ले लेंगे
मुकाम देने से पहले ज़ुबान ले लेंगे

मेरा सवाल है जो चार सौ कमाते हैं
वो कितने दिन में घर का मकान ले लेंगे

ये शे'र देखिये.......

रोशनी को और गहरा कर के देखा जाएगा
अब तेरा चेहरा अंधेरा कर के देखा


और अब आख़िर में..... अहमद कमाल परवाज़ी
की बेहद लोकप्रिय ग़ज़ल के अशाअर मुलाहिज़ा फ़रमाइये....

फ़कीरों से खुशामद की कोई उम्मीद मत रखना
अमीरे शहर तुम हो ये ज़हमत तुमको करना है

तुम्हारे फ़ैसले पर फ़ैसले सब छोड़ रख्खे हैं
अगर नफ़रत भी करना है तो नफ़रत तुमको करना है

हम अपना काम करते चले जाएंगे महफ़िल से
फ़िर इसके बाद ऊर्दू की हिफ़ाज़त तुमको करना है.