भगवान महावीर के अनुयाइयों द्वारा वर्ष में एक बार पर्युषण पर्व के रूप में एक अदभुत पर्व मनाया जाता है. मैं जैन नहीं लेकिन कई जैन परिवारों से मित्रता है. उनके कार्ड,एस.एम.एस.और फ़ोन आते हैं और हाँ अब ई-मेल भी आने लगे हैं जिसमें क्षमा की भावुक अभिव्यक्ति होती है. मुझे यह पर्व विशेष रूप से इसलिये अच्छा लगता है कि जाने-अनजाने हुए तमस,तनाव,क्रोध और त्रुटी के लिये एक मौका मिल जाता है हम अपने मित्रों और परिजनों से अपने द्वारा हुई त्रुटियों के लिये माफ़ी मांग लें. इस बार भी कई संदेश मिले जिनमें क्षमा का भाव व्यक्त था.
मुझे लगता है ब्लागर बिरादरी में भी इस तरह का क्षमा पर्व मनाना चाहिए . साल भर में एक बार मनाए जाने इस पर्व में दिल की सफ़ाई भी हो जाएगी और मन भी हल्का हो जाएगा.जो यह मानता है कि उससे कोई ग़लती हो ही नहीं सकती उसके लिये तो मेरे सुझाव फ़िजूल ही हैं लेकिन जो विनयशील हैं और संजीदगी से अपनी ग़लतियों का अहसास करते हैं उनका ध्यान नीचे लिखी बातों की ओर ले जाना चाहूंगा. निम्नांकित बातो के लिये हम ब्लाग बिरादरी से क्षमा मांग सकते हैं....
-किसी का ब्लाग पढ़ा ...अच्छा भी लगा लेकिन मैने ऐसा क्यों नहीं लिखा ऐसा ईर्ष्या भाव मन में आए तो क्षमा मांगना चाहिये.
- किसी को बताए बिना किसी की सामग्री का उपयोग किया ..ऐसा करने के लिये क्षमा मांगना चाहिये.
- किसी ने आपके लिखे की प्रशंसा की लेकिन आपने ई-मेल के ज़रिये या अपने ब्लाग पर टिप्प्णीकारों के प्रति साधुवाद नहीं प्रकट किया ...इस बात के लिये क्षमा प्रार्थना करना चाहिये.
- किसी के लिखे पर अर्नगल टिप्पणी की और उससे किसी का दिल दुखा और यदि हमें इस बात का भान बाद में भी आया है तो हमें उसके लिये विनम्रतापूर्वक मुआफ़ी मांग लेनी चाहिये.
हो सकता है मेरा सुझाव भावुकता भरा हो लेकिन ब्लागर बिरादरी में मेरे संपर्क में आए ऐसे कई संजीदा मित्र हैं जो मेरी इस बात को तवज्जो देंगे. इस काम के लिये किसी मुहूर्त , पंचांग और चोघडिये की ज़रूरत नहीं . मै स्वयं जाने अगजाने में हुई त्रुटी के लिये मेरी इस पोस्ट से आप सभी से करबध्द क्षमा याचना करता हूँ...हाल फ़िलहाल ऐसी कोई त्रुटी ध्यान तो नहीं आ रही लेकिन अवचेतन मन भी तो कई तरह की चोरी और अपराध करता है.अंग्रेज़ी में कहा भी तो है...चैरिटी बिगिन्स एट होम !.
(ब्लाग शब्द लिखते समय ब्ला के उपर चंद्र लगना चाहिये लेकिन ये कैसे होता है मुझे मालूम नहीं
विग्यापन में ग्य भी लिखना नहीं आता ...इसलिये कई बार इश्तिहार या एडवरटाइज़मेंट लिखता हूँ..ऐसा न कर पाने के लिये भी क्षमा करें..और हाँ कोई ब्लागर मित्र ऐसा कर पाना बता सकें तो बड़ी मेहरबानी...कृपया sanjaypatel1961@gmail.com पर एक ई-मेल भेजने की कृपा करें.
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Thursday, September 20, 2007
Wednesday, July 25, 2007
क्रिकेट कोच के लिये एक अचूक समाधान

देखिये मैं रहता हूं रायबहादुरों के शहर इन्दौर में.उपाधियाँ तो उनके साथ ही चली गईं जिन्हे दी गईं थीं.अब रह गए हैं हम जो बिन पूछे ही राय देते रहते हैं तो इस लिहाज़ से हम भी तो थोड़े बहुत रायबहादुर हो हे गए न ? मनुष्य,परिवेश,शहर,राज्य या राष्ट्र जब संकट में हो तो हमारा फ़र्ज़ भी तो बनता है कि हम अपनी ओर से कुछ योगदान दें ..बहुत दिनों से अख़बारों में पढ़ रहा हूँ कि भारतीय क्रिकेट टीम के लिये एक अदद कोच नहीं मिल रहा ! दिमाग़ पर ज़ोर डाला तो अपने पिटारे में अमोघ शस्त्र की तरह एक समाधान मिला.आप और माननीय पँवार साहब मुलाहिज़ा फ़रमाएँ ...जँचे तो उपयोग में लाएँ..राष्ट्रवादी संगठन एकदम प्रसन्न हो जाएँ (ख़ुश नहीं...उर्दू का शब्द है ) नितांत स्वदेशी समाधान है.
करना कुछ नहीं है नीचे दिये गए विभागों की सार सम्हाल के लिये पूर्व खिलाडियों या साज़िश (साँरी षड़यंत्र) के तहत टीम से निकाले गए खिलाडि़यों (यथा:इरफ़ान पठान,सुरेश रैना,मों.कैफ़,मुरली कार्तिक आदि)की नियुक्ति करना है.ध्यान इतना ही रखना है कि हर विभाग के लिये एक एक कोच रखना होगा..इस तरह से कुल ....कोचेज़ की नियुक्ति हो जाएगी.टोटल अभी इसलिये नहीं किया कि अभी राय देने के मूड में हूँ और गणित (जो कि मेरा कमज़ोर विषय रहा है) रचनात्मक प्रकल्पों मे विघ्न डालता है...तो साहेबान,मेहरबान देखिये नीचे वाली सूची को ....
-बैटिंग कोच
-फ़ास्ट बाँलिंग कोच
-स्पिन बाँलिंग कोच
-आँफ़ साइड फ़िल्डिंग कोच
-आँन साइड फ़िल्डिंग कोच
-क्लोज़ इन फ़िल्डिंग कोच
-विकेट कीपिंग कोच
-फ़िटनेस कोच
-केप्टन को गाइड करने वाला कोच
-वाइस केप्टन को गाइड करने वाला कोच
-ट्वेल्थमेन को गाइड करने वाला कोच
इस तरह से आप देखेंगे और देखना भी चाहिये (आख़िर देश की इज़्ज़त का सवाल है) कि हर विभाग के लिये एक ज़िम्मेदार व्यक्ति की नियुक्ति हो जाती है तो कोई अकेला कोच नहीं कह सकेगा के ग़लती मेरी नहीं है.इससे देश के पुराने और समय से पहले रिटायर्ड हो चुके (या कर दिये गए) खिलाड़ियों को रोज़गार मिलेगा...ग्यारह लोगों की नियुक्ति निश्चित रूप से ख़र्चे का सौदा है लेकिन शर्तिया कहता हूँ एक विदेशी कोच की से सस्ता है..हर हाल में सस्ता है! और कितना ताज़ा है सर !रिलायंस फ़्रेश की तरह .देखिये अजीत वाडेकर,बापू नाडकर्णी और हेमू अधिकारी के बाद जब पहली बार जाँन राइट या ग्रेग चैपल की नियुक्ति की गई तब भी तो तकलीफ़ आई थी न ? तो ये अलहदा नया-नकोरा विचार थोड़ा रिस्की ज़रूर प्रतीत होता है लेकिन देखियेगा कि काँसेप्ट चल ही नहीं निकलेगा ट्रेंड सैटर भी साबित होगा...आपने किया..पीछे पीछे दूसरे देश भी इसे फ़ाँलो करेंगे.ज़रा सोचिये (प्लीज़) क्या नज़ारा होगा एयरपोर्ट पर कि क्रिकेट टीम के साथ ग्यारह कोच भी उतरेंगे वर्ल्ड कप लेकर..हाल-फ़िलहाल तो ये सपना लगता है (महामहिम कलाम साहब कहते भी तो हैं न कि सपने देखना चाहिये)लेकिन साकार ज़रूर हो सकता है .पँवार साहब कर डालिये इस विचार को साकार.आप रातों रात इस काँसेप्ट के अविष्कारक कहलाएंगे (एक ख़ालिस भारतीय के रूप में मुझे इस विचार के लिये कोई राँयल्टी नहीं चाहिये ! ) गणेश उत्सव नज़दीक आ रहा है ...मंगलमूर्ति का ध्यान कर इस शुभ विचार का मंगलाचरण कर ही दीजिये..और कोच को लेकर सारी अटकलों को विराम दे दीजिये !
( टीप>जैसे उर्दू ग़ज़ल में रिवायत है कि किसी भी नई रचना को किसी उस्ताद से पहले जँचवा लेते हैं ; उसे इसलाह करना कहते हैं . मै उस्ताद आलोक पुराणिक से गुज़ारिश करूंगा कि वे इस विचार की इसलाह कर दें बडी़ कृपा होगी ..उनके मुरीदों में यदि कोई पढे़ तो उन्हे ख़बर कर दे जिससे इस देश की एक राष्ट्रव्यापी समस्या का समाधान अविलंब निकल आए...मैने भी ठान रखी है कि जब तक उस्ताद जी इसकी इसलाह करने की ज़हमत नहीं उठाते मैं ये काँसेप्ट माननीय पँवार साहब को फ़ाँरवर्ड नहीं करूंगा )
Wednesday, July 18, 2007
मोबाईल झूठ से घिर गई है ज़िन्दगी हमारी

मोबाइल तो ज़िन्दगी का वैसा ही हिस्सा हो गया है जैसे धूप,हवा और पानी.लेकिन इस साधन ने हमें काफ़ी हद तक झूठ की ओर धकेला है.हम सब ही उन तरीक़ों को इस्तेमाल कर रहे हैं जो निश्चित रूप से हममे मौजूद मनुष्य को मार रहे हैं.कैसे ? कुछ बानगियाँ देखें:
-मोबाइल बजा...आपकी फ़ोन बुक में काँल करने वाले का नाम है..आप अटेण्ड नहीं करना चाह रहे.. . बजने दीजिये घंटी.(पहला झूठ)
-मोबाइल बजा...आप नहीं जान रहे कौन काँल कर रहा है...आपने काँल अटेण्ड किया..सामने वाला कह रहा है...भैया दफ़्तर में हैं क्या ? आपने पूछा..क्यों ? काँलर : नहीं मै एक दस मिनट के लिये आना चाहता था...आप कहें तो..
आप मिलना नहीं चाहते..तो जवाब दे दीजिये...भाई साहब एक्चुली क्या है कि मैं दफ़्तर से आठ कि.मी.दूर हूँ अभी.तो यदि मुमकिन हो तो कल का रख लें (दूसरा झूठ)
-आपका जाना-पहचाना नम्बर चमक रहा है मोबाइल के स्क्रीन पर..आपका मन नहीं उठाने का..थोड़ी देर बाद थक कर काँलर ने घंटी देना बंद कर दी...अब टूँ..टूँ बजी है...एस.एम.एस. आया है ..उसी का जिसका काँल आपने अभी अभी अटेण्ड नहीं किया..संदेश में लिखा है...योर चैक इज़ रैडी...काँटेक्ट इमीजियेटली...(आपका भुगतान तैयार है,तत्काल संपर्क करें)आप तुरंत काँल कर रहे हैं ..कहते हैं मैडम आपका मिस काँल देखा..कैसे याद किया था...मैडम:मैने आपको एस.एम.एस.भी तो किया था सर ! आपने नहीं देखा क्या ? जी नहीं..बताएँ..मैडम: सर वो आपका पैमेंट था न ..आपकी डायरेक्टर साहब से बात हुई थी...चैक तैयार है सर..जी मैडम अभी आया(सरे आम तीसरा झूठ)
-पत्नी का फ़ोन है घर से (लैण्ड्लाईन नम्बर दिख गया है स्क्रीन पर) आपने फ़ोन उठाया..हाँ डियर बोलो..उन्होने पूछा..कहाँ हो आप..आपका जवाब रास्ते में ..सुनिये...बोर्नविटा ख़त्म हो गया है लेते आइयेगा...अरे यार तुम हमेशा लेट फ़ोन करती हो...मै तो तक़रीबन घर के गेट के पास ही आ गया हूं (जबकि कम से कर आधा कि.मी. दूर हैं) कहाँ हो दिख तो नहीं रहे...आपका जवाब ..अरे यहीं काँलोनी के चौकीदार से बात कर रहा हूं (चौथा झूठ)
-किसी ने आपको फ़ोन किया है...नम्बर आपका जाना पहचाना है...फ़ोन बुक में दर्ज़ नहीं है इसलिये नाम नहीं आ रहा मोबाइल के स्क्रीन पर ...आप उसे अटैण्ड नहीं करना चाह रहे हैं...वह ज़्यादा समझदार है...उसने तय किया है कि वह आज आपसे संपर्क कर के ही रहेगा...उसने पास बैठे मित्र के मोबाइल से आपको काँल किया है..आप नम्बर नहीं पहचानते सो आपने उठा लिया..लाइन पर वही है जिसको आप टालना चाहते हैं..हाँ मै रवि बोल रहा हूँ संजय भाई..मैने अभी फ़ोन लगाया था आपने उठाया नहीं...जवाब..यार मोबाइल पहली मंज़िल पर मेरे केबिन में रह गया था..बस अभी एंटर हुआ हूं..लेकिन ये नम्बर तो तुम्हारा नहीं (तफ़तीश कर रहे हैं हुज़ूर!)एक और मोबाइल ले लिया क्या ?अब सामने वाले को भी तो झूठ बोलना पडे़गा..सो उसका जवाब..नहीं नया नहीं लिया एक मित्र बैठे हैं यहाँ पर उनसे लेकर काँल किया तुम्हे.(यहाँ तक सच बोला है वह..अब झूठ सुन लीजिये) दर-असल अभी अभी मेरे मोबाइल की बैटरी डाउन हो गई न इसलिये इनसे लेकर लगाया है.(भरी धूप में पाँचवा झूठ )
-और अब आख़िरी झूठ...किसी का जाना पहचाना नम्बर घरघरा रहा है आपके मोबाइल पर...आप टाल रहे हैं..वह बेचारा शाम तक आपको ट्राय करता रहा...शाम को किसी से आपका लैण्ड्लाइन नम्बर मिला ..वह पूछ रहा है..यार आपको दिन भर से ट्राय कर रहा हूं ..बात ही नहीं हो पा रही..क्या मोबाइल नम्बर बदल गया..आपका जवाब..नहीं भाई घर भूल आया हूं आज..उसने जानकारी दी: घर पर भी कोई नहीं उठा रहा...आपका जवाब..कोई है ही कहाँ घर पर..तुम्हारी भाभी शाँपिंग करने गई है और बच्चे स्कूल !(छठा झूठ)
तो मित्रों ...ये झुनझुना हमें अव्वल दर्ज़े का झूठा बना रहा है..और ले जा रहा है ऐसी ग़र्त में जहाँ से वापस लौटना संभव नहीं.किसी अच्छाई के लिये या मजबूरी में एक - आध झूठ बोलना पडे़ तो समझ में आता है लेकिन दिन भर हम झूठ से घिरे रहें ..ठीक नहीं लगता..क्या यह भी एक खरा सच नहीं कि जिस झूठ का इस्तेमाल हम दूसरों के साथ कर रहे हैं वैसा ही कोई और भी हमारे साथ कर रहा है या कर सकता है...बददुआ नहीं दे रहा लेकिन कटु सच्चाई यही है कि किसी दिन हम सब (मै भी) मोबाइल झूठ के कारण ज़िन्दगी में बड़ा नुकसान कर बैठेंगे...अब जब भी आपके मोबाइल पर घंटी बजे तो यह भी सोचियेगा कि कहीं कोई मित्र/परिजन तकलीफ़ में तो नहीं..कहीं किसी को आपकी मदद की दरकार तो नहीं...कहीं कोई बीमार तो नहीं...दूर रिश्तेदारी में किसी बूढ़े काका के गुज़र जाने का समाचार तो नहीं..और दु:ख ही क्यों..कोई खु़शी देने वाली या सुकून भरी ख़बर भी तो हो सकती है....बहन का रिश्ता पक्का तो नहीं हो गया...बिटिया का रिज़ल्ट तो नहीं आ गया...आपका प्रमोशन तो नहीं हो गया..कोई सम्मान तो नहीं मिल गया आपको...पिताजी गाँव में ज़मीन का तीस साल पुराना केस तो नहीं जीत गए..माँ को आपकी याद तो नहीं आ रही...मित्र आपसे ये बताने को बेताब तो नहीं कि आज ही के दिन हमारी दोस्ती शुरू हुई थी ..
बहुत से अच्छे - बुरे समाचारों,बातों और मुलाक़ातों के सिलसिले समेट लाता है किसी का फ़ोन..ज़रूरी नहीं कि हर घंटी आपको परेशान करने के लिये ही बज रही है...तो सकता है कोई और भी परेशान हो रहा हो.
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