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Wednesday, September 24, 2008

इन्दौर में लता दीनानाथ मंगेशकर ग्रामोफ़ोन रेकॉर्ड संग्रहालय का शुभारंभ २७ को



पुराने गीत-संगीत ने भारतीय अवाम को जो सुख और सुकून अता किया है; वह बेमिसाल है। स्वर-साम्राज्ञी भारतरत्न लता मंगेशकर के जन्मदिवस की पूर्व संध्या में ऐसे ही मधुर संगीत के दुर्लभ ग्रामोफ़ोन रेकॉड्र्स की विशाल लायब्रेरी "लता दीनानाथ मंगेशकर ग्रामोफ़ोन रेकॉर्ड संग्रहालय' का शुभारंभ शनिवार, २७ सितम्बर २००८ को संध्या ४.३० बजे,इन्दौर के उपनगर पिगडंबर (राऊ) में होगा. यह संग्रहालय दुर्लभ ग्रामोफ़ोन रेकॉर्ड्स के संकलनकर्ता श्री सुमन चौरसिया का कारनामा है. वे पिछले चालीस बरसों से एक जुनूनी की तरह पूरे देश से इन ध्वनिमुद्रिकाओं को संकलित कर रहे हैं.
उल्लेखनीय है कि संगीतप्रेमियों, शोधार्थियों, कलाकारों एवं मीडिया के लिए देशभर में अपनी तरह की इस पहली म्यूज़िक लायब्रेरी में शास्त्रीय, लोक, सुगम एवं फ़िल्म संगीत के २८ हज़ार से भी ज़्यादा नायाब रेकॉर्ड्स संग्रहित हैं। संगीतप्रेमी जानते हैं कि इन्दौर में जन्मीं लताजी आगामी २८ सितम्बर को जीवन के ८० वर्ष पूर्ण करने जा रहीं हैं। "लता दीनानाथ मंगेशकर ग्रामोफ़ोन रेकॉर्ड संग्रहालय' भारतीय चित्रपट संगीत में पं. दीनानाथ मंगेशकर एवं लताजी के महान अवदान को समर्पित है। शुभारंभ-प्रसंग में अपने लेखन से भारतीय चित्रपट एवं गीत-संगीत को समृद्ध करने वाले चित्रपट संगीत स्तंभकार श्री अजातशत्रु, फ़िल्म इतिहासकार श्रीयुत् श्रीराम ताम्रकर, वरिष्ठ फ़िल्म समीक्षक श्री जयप्रकाश चौकसे, राजस्थान पत्रिका के फ़िल्म समीक्षक श्री एम.डी. सोनी, फ़िल्म संगीत विषयों के लेखक श्री विश्वनाथ चटर्जी एवं सांस्कृतिक पत्रकार श्री रविराज प्रणामी का सम्मान भी होगा।


लताजी के जन्मदिन रविवार, २८ सितंबर को संगीतप्रेमी इस नव-निर्मित लायब्रेरी में प्रात: ११ से संध्या ५ बजे के बीच अपनी पसंद के लता-गीत सुन सकते हैं। इसी मौक़े पर संग्रहालय में श्रीनिवास पुजारी द्वारा लताजी के दुर्लभ चित्रों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। श्री अजातशत्रु की मीमांसा से लकदक लता मंगेशकर के दुर्लभ और अनसुने गीतों पर एकाग ग्रंथ "बाबा तेरी सोनचिरैया' की अग्रिम बुकिंग भी इस अवसर पर प्रारंभ होगी।

मंगेशकर ग्रामोफ़ोन संग्रहालय में हैं.......
-लगभग २८ हज़ार रेकॉर्डस
-सन् १९०२ का दुर्लभ रेकॉर्ड
-लता मंगेशकर के प्रथम गीत की ध्वनि मुद्रिका
-मास्टर मदन की आठ दुर्लभ रचनाएँ.
-मास्टर दीनानाथ मंगेशकर की हिन्दी रेकॉर्ड
-अधिकतम रेकॉडर्स ७८ आर.
-चौकोर रेकॉर्ड,रंगबिरंगी रेकॉर्ड.
-शास्त्रीय,फ़िल्म,लोक एवं सुगम संगीत, ग़ज़ल, क़व्वाली एवं पश्चिमी संगीत का अनमोल ख़ज़ाना

Sunday, June 1, 2008

हज़ारों ध्वनि-मुद्रिकाओं के जुनूनी संकलनकर्ता सुमन चौरसिया


वह बहुत फक्कड़ इन्सान है; बेहद सादा तबियत, बहुत अव्यवस्थित लेकिन जुनून का उसी तरह पक्का जैसा कोई जेहादी होता है। उसका "जेहाद' है संगीत की उन दुर्लभ रचनाओं को संकलित करने का जो किसी भी क़ीमत पर और कैसे भी उनके संग्रह में होना चाहिये। मैने जेहाद शब्द इसलिये भी इस्तेमाल किया कि इस शख़्स का जुनून चोखे सुर की सचाई को महफ़ूज़ करना है बेसुरेपन को नहीं।न जाने कहाँ कहाँ से और किस क़ीमत पर उस शख़्स ने चूड़ी वाले बाजे के दौर (७८ आरपीएम) के रेकॉर्ड्स संकलित किये है या तो वही जानता है या उसका ख़ुदा. सबसे बड़ी बात जो इस इंसान को विशिष्ट बनाती है वह है सुरों की सुरभि को बॉंटने का शगल। सुमन चौरसिया नाम है इस ज़ालिम का (हम प्यार से उसे ज़ालिम कहें तो क्या करें भाई हमारा हिंदुस्तानी संगीत के सबसे बड़े ख़ज़ाने का मालिक जो ठहरा) इन्दौर से कोई पन्द्रह बीस कि.मी. दूर राऊ पहाड़ी की तलहटी में बसे इलाके पिगडम्बर में आप हुज़ूर बसते हैं और क्या फक्कड़ ठाठ से बसते हैं। रईस से रईस इन्सान भी उनके संकलन की फेहरिस्त सुनकर रश्क़ करने लगे। क्या नौश फ़रमाऍंगे आप जौहरजान, मिस मुन्नी, अख़्तरी बाई, इक़बाल बानो की ग़ज़लें या पं. गोविंदराम की धुनें? ललिता पॅंवार को गाते सुनना चाहेंगे आप? या राजकपूर का गाना सुनना पसंद करेंगे। मेहॅंदी हसन की ग़ज़लें तो गली गली बिकती हैं, उनके फ़िल्मी गीत सुनने की चाहत है आपकी? तलत महमूद की बॉंग्ला या गुजराती ग़ज़लें सुनेंगे आप? या रफ़ी साहब का सिंधी सूफ़ी तराना? महाकाल की आरती (माफ़ कीजिये जय शिव ओंकारा नहीं) से रोमांचित होना चाहते हैं (ये आरती महाकालेश्वर मंदिर के रेकॉर्ड में भी शायद मिले) या होलकर राजवंश की चूड़ी वाले बाजे पर बजने वाली बैण्ड की धुन पर ख़ुश हो जाना चाहेंगे? (इन्दौर की महारानी उषाराजे होलकर के बेशक़ीमती ख़ज़ाने में कई हीरे-पन्ने हो; शायद ये रेकॉर्ड मिले)


ख़ैर फ़ेहरिस्त बहुत लम्बी है लेकिन आपको बाख़बर करने के लिये ये ज़रूरी है कि सुमन चौरसिया दरअसल संगीत-संकलनकर्ताओं की राष्ट्रीय सूची में एक चमचमाता नाम हैं। सुमन चौरसिया के आलोचकों (जो उनसे गीत जुगाड़ने के लिये मुँह पर ये बात नहीं बोलते) के लिये यह बात बड़े काम की हो सकती है कि सुमन शास्त्रीय संगीत राग-रागिनियॉं और कविता शायरी ठीक से नहीं जानता। मैं उनसे कहता हूँ कि ये बंदा तो ठीक से अपना नाम भी नहीं लिख सकता। मुझे आलोचकों से एक ही सवाल करना है मेहॅंदी हसन से कभी किसी ने पूछा ख़ॉं साहब आप कहॉं तक पढ़े हैं; लताजी से कभी किसी ने जानना चाहा कि दीदी आपने ग्रेज्युएशन किस यूनिवर्सिटी से की है। बेग़म अख़्तर कौन से मदरसे में पढ़ने गईं थीं लेकिन याद रखियेगा इन सारे महान कलाकारों को उनके फ़न के लिये ज़माना सलाम करता है। चौकिएगा मत किसी दिन इन्दौर विश्व-विद्यालय के कुलपति कहें कि सुमन भाई आपको आपके संगीत अवदान के लिये हम डॉक्टरेट देना चाहते हैं। वाह क्या बात है; डॉ. सुमन चौरसिया। यहाँ ये उल्लेख भी प्रासंगिक होगा कि सुमन भाई के कारनामें के लिये उनके खाते में कोई सम्मान या पुरस्कार भी नहीं है;और वह उसकी परवाह भी नहीं करता.हाँ मीडिया में ज़रूर ऐसे कुछ दर्दी लोग हैं जिन्होंने सुमन भाई की मेहनत को रेखांकित किया है. वर्षों पहले जनसत्ता के साप्ताहिक परिशिष्ट सबरंग ने सुमन भाई पर कवर स्टोरी की थी.नईदुनिया में सुरेश गावड़े,अजातशत्रु और ख़ाकसार जब तब सुमन भाई पर क़लम चलाते ही रहे हैं.

हुज़ूर मेरे अपने शहर इन्दौर की गलियों की ख़ाक छानने वाले इस शख़्स के हुलिये, उसकी क़ाबिलियत उसकी पढ़ाई लिखाई पर मत जाइये उसका कमिटमेंटमुबारक बेग़म, पं. हृदयनाथ मंगेशकर से लेकर सुर-सरस्वती लता मंगेशकर तक सुमन चौरसिया के पागलपन का आदर करतीं हैं इसे पागलपन कहूँ तो और क्या कि जिसके घर के रसोईघर में आटे के कनस्तर नहीं चूड़ी वाले बाजे की रेकार्डें रखीं रहतीं हों। सुमन भाई ने सुना कि कि फलॉं जगह फ़लाँ आर्टिस्ट की रेकार्ड मिल रही है और सुमन भाई के पास पैसे नहीं हैं; सोचिये ये दीवाना क्या करेगा ? ये अपनी पत्नी के हाथ से दो सोने की चूड़ियॉं उतरवाएगा है; अपने शहर के जौहरी बाज़ार (जिसे सराफ़ा के नाम से जाना जाता है) आएगा, चूडियाँ बेचेगा ; आगरा-मुम्बई राजमार्ग पर आएगा ; भूखा-प्यासा दो दिन ट्रक में बैठकर सांगली, पुणे, कोलकाता, सूरत या किसी और शहर से रेकॉर्ड ख़रीदकर घर ले लाएगा; सुनेगा और सुनाएगा।


रेकॉर्ड लेकर आने के बाद सुमन क्या करेंगे? अपने कुछ दीवाने दोस्तों को एस.टी.डी. का ख़र्चा उठाकर रात ११ बजे, १२ बजे कॉल करेंगे; मियाँ सुनिये ज़रा ज़ोहरा अम्बालेवाली को;(आप भी कोई अनमोल रचना सुनना चाहें तो आज़मा लें इस यारबाज़ आत्मा को : 09301398437)आज जवॉं हो रहे कार्पोरेट कल्चर और सोफ़ेस्टिकेटेड लोगों के बीच सुमन चौरसिया "मिस फ़िट' और सच्चे संगीतप्रेमियों के बीच ऑल-टाइम' हिट हैं। व़क़्त बेरहम है; और ज़माना ठेठ एहसानफ़रामोश सुमन चौरसिया भी गुदड़ी के लाल हैं। घर फूँकने वाले सुमन भाई दीनानाथ लता मंगेशकर लायब्रेरी बनाने के लिये संकल्पित हैं ; दो-पॉंच लाख लगा चुके हैं, उधारी भी ले रखी है और अपनी धुन के पक्के हैं ; जो सोचा है वह कर के रहेंगे

सुमन चौरसिया को इस बात से कोई मतलब नहीं कि उसका कारनामा इतिहास में दर्ज़ होगा या नहीं,या मीडिया उसके संकलन को प्रसार देगा या नहीं; ये औलिया तो इन बातों से बेख़बर रेकॉर्डों के कलेक्शन लगा हुआ है कृष्ण बिहारी नूर का शे’र सुन लीजिये, आपको समझ में जाएगा सुमन चौरसिया किस मिट्टी के बने हैं

मैं एक क़तरा हूँ मेरा अलग वजूद तो है
हुआ करे जो समंदर मेरी तलाश में है