
पुराने गीत-संगीत ने भारतीय अवाम को जो सुख और सुकून अता किया है; वह बेमिसाल है। स्वर-साम्राज्ञी भारतरत्न लता मंगेशकर के जन्मदिवस की पूर्व संध्या में ऐसे ही मधुर संगीत के दुर्लभ ग्रामोफ़ोन रेकॉड्र्स की विशाल लायब्रेरी "लता दीनानाथ मंगेशकर ग्रामोफ़ोन रेकॉर्ड संग्रहालय' का शुभारंभ शनिवार, २७ सितम्बर २००८ को संध्या ४.३० बजे,इन्दौर के उपनगर पिगडंबर (राऊ) में होगा. यह संग्रहालय दुर्लभ ग्रामोफ़ोन रेकॉर्ड्स के संकलनकर्ता श्री सुमन चौरसिया का कारनामा है. वे पिछले चालीस बरसों से एक जुनूनी की तरह पूरे देश से इन ध्वनिमुद्रिकाओं को संकलित कर रहे हैं.
उल्लेखनीय है कि संगीतप्रेमियों, शोधार्थियों, कलाकारों एवं मीडिया के लिए देशभर में अपनी तरह की इस पहली म्यूज़िक लायब्रेरी में शास्त्रीय, लोक, सुगम एवं फ़िल्म संगीत के २८ हज़ार से भी ज़्यादा नायाब रेकॉर्ड्स संग्रहित हैं। संगीतप्रेमी जानते हैं कि इन्दौर में जन्मीं लताजी आगामी २८ सितम्बर को जीवन के ८० वर्ष पूर्ण करने जा रहीं हैं। "लता दीनानाथ मंगेशकर ग्रामोफ़ोन रेकॉर्ड संग्रहालय' भारतीय चित्रपट संगीत में पं. दीनानाथ मंगेशकर एवं लताजी के महान अवदान को समर्पित है। शुभारंभ-प्रसंग में अपने लेखन से भारतीय चित्रपट एवं गीत-संगीत को समृद्ध करने वाले चित्रपट संगीत स्तंभकार श्री अजातशत्रु, फ़िल्म इतिहासकार श्रीयुत् श्रीराम ताम्रकर, वरिष्ठ फ़िल्म समीक्षक श्री जयप्रकाश चौकसे, राजस्थान पत्रिका के फ़िल्म समीक्षक श्री एम.डी. सोनी, फ़िल्म संगीत विषयों के लेखक श्री विश्वनाथ चटर्जी एवं सांस्कृतिक पत्रकार श्री रविराज प्रणामी का सम्मान भी होगा।

लताजी के जन्मदिन रविवार, २८ सितंबर को संगीतप्रेमी इस नव-निर्मित लायब्रेरी में प्रात: ११ से संध्या ५ बजे के बीच अपनी पसंद के लता-गीत सुन सकते हैं। इसी मौक़े पर संग्रहालय में श्रीनिवास पुजारी द्वारा लताजी के दुर्लभ चित्रों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। श्री अजातशत्रु की मीमांसा से लकदक लता मंगेशकर के दुर्लभ और अनसुने गीतों पर एकाग ग्रंथ "बाबा तेरी सोनचिरैया' की अग्रिम बुकिंग भी इस अवसर पर प्रारंभ होगी।
मंगेशकर ग्रामोफ़ोन संग्रहालय में हैं.......
-लगभग २८ हज़ार रेकॉर्डस
-सन् १९०२ का दुर्लभ रेकॉर्ड
-लता मंगेशकर के प्रथम गीत की ध्वनि मुद्रिका
-मास्टर मदन की आठ दुर्लभ रचनाएँ.
-मास्टर दीनानाथ मंगेशकर की हिन्दी रेकॉर्ड
-अधिकतम रेकॉडर्स ७८ आर.
-चौकोर रेकॉर्ड,रंगबिरंगी रेकॉर्ड.
-शास्त्रीय,फ़िल्म,लोक एवं सुगम संगीत, ग़ज़ल, क़व्वाली एवं पश्चिमी संगीत का अनमोल ख़ज़ाना




