Showing posts with label फ़िल्म संगीत. Show all posts
Showing posts with label फ़िल्म संगीत. Show all posts

Sunday, July 5, 2009

इन्दौर का सिख मोहल्ला अब कहलाएगा भारतरत्न लता मंगेशकर मार्ग


दुनिया की सबसे सुरीली आवाज़ लता मंगेशकर का जन्म (28 सितम्बर 1929) इन्दौर में हुआ है. आने वाले सितम्बर में लताजी पूरे 80 बरस की हो जाने वालीं हैं.इन्दौर की नगर पालिक निगम ने सैध्दांतिक रूप उस एक प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी है जिसके तहत इन्दौर के सिख मोहल्ले की दो सड़कों में से एक का नाम भारतरत्न लता मंगेशकर मार्ग कर दिया जाएगा. उल्लेखनीय है कि इसी सिख मोहल्ले में अपनी मौसी के घर में लताजी का जन्म हुआ था.

इन्दौर नगर पालिक निगम की महापौर डॉ.उमाशशि शर्मा और सभापति शंकर लालवानी ने व्यक्तिगत रूचि लेकर इस प्रस्ताव को पारित करवाने में अथक प्रयास किये. उल्लेखनीय है कि सन 1984 से लता मंगेशकर अलंकरण पुरस्कार समारोह भी इन्दौर में आयोजित किया जाता रहा है जिसमें अब तक चौबीस गायक और संगीतकार सम्मानित किये जा चुके हैं. मध्य प्रदेश के संस्कृति विभाग द्वारा सुगम संगीत के क्षेत्र में दिया यह देश का सबसे बड़ा पुरस्कार है. हालाँकि स्वयं लताजी इस पुरस्कार में कभी नहीं आईं हैं .हाँ ये बता दूँ कि लताजी के नाम से स्थापित इस अहम पुरस्कार से आशा भोंसले और पं.ह्र्दयनाथ मंगेशकर भी नवाज़े जा चुके हैं.सन 1983 में इन्दौर में ही लता-रजनी के नाम से लताजी का भव्य लाइव शो भी आयोजित किया जा चुका है और उसी समारोह में तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुनसिंह ने लताजी के नाम से इस प्रतिष्ठा अलंकरण की स्थापना की घोषणा की थी.

उस दौर में जब नेताओं के नाम से ही सड़कें और मूर्तियों के नामकरण का चलन है इन्दौर ने एक सड़क को सर्वकालिक महान स्वर-कोकिला के नाम समर्पित करने का फ़ैसला लेकर प्रशंसनीय पहल की है. सबसे बड़ी बात यह है कि इन्दौर नगर पालिक निगम में इस शुभ काम के लिये सही समय (लताजी 80 वाँ जन्मवर्ष) का चयन किया है साथ ही यह काम लताजी के जीवन काल मे होने जा रहा है जो समस्त लता मुरीदों के लिये अत्यंत हर्ष का विषय है.

मैंने बीती शाम मुंबई फ़ोन कर के लता दीदी को इस पहल की सूचना दी जिस पर उन्होंने अपनी मीठी आवाज़ में धन्यवाद कहा. मैंने उनके स्वर में इस बात की असीम प्रसन्नता महसूस की कि उनकी जन्मभूमि ने यह भावनात्मक तोहफ़ा उन्हें दिया.यूँ देखा जाए तो लता मंगेशकर जैसी अज़ीम शख़्सियत के लिये कोई भी सम्मान बहुत छोटा है लेकिन जब आपकी जन्मस्थली आपको याद करे तो बात ही कुछ और होती है.