मुझे क्या आता है ?
भीमसेन जोशी के भारतरत्न होने पर एक आदरांजलि
शब्दों का अतिरेकी जंजाल और सुने सुनाए संस्मरण
वह तो नहीं आता जो पंडितजी के कंठ से झरता है
रज़ा के रचना संसार और उनकी कूँची का प्रवाह
जिसकी समीक्षा कर मैं आत्मप्रवंचना से भर जाता हूँ
वह तो नहीं आता जो रज़ा साहब के ब्रश से बहता है
मेहंदी हसन की ग़ज़लों पर उस्तादी दिखाता मेरा क़लम
जिसकी तारीफ़ का क़िला बना कर मैं इठलाता हूँ
वह तो नही आता जो उस्ताद के गले में हरक़त करता है
बिरजू महाराज के कथक से आलोकित होता मंच
जिसकी वाह वाह से कर देता हूँ मैं किसी पत्रिका के पन्ने काले
वह तो नहीं आता जो महाराजजी की परनों और तोडों में थिरकता है
ज़ोहरा अंबालेवाली और अमीरबाई के गीतों में सिरजता माधुर्य
जिसमें सजी धुन का तबसिरा कर मैं झूम जाता हूँ
वह तो नहीं आता जो उनके तीन मिनट के करिश्मे में सुनाई देता है
एम.एस.सुब्बुलक्ष्मी के पावन स्वर में स्पंदित होता मार्दव
जिसे सुन मैं ध्यान मग्न हो एक कविता गढ़ देता हूँ
वह तो नहीं आता जो उनके कंठ से बहे शब्द को प्रार्थना बना देता है
पंडितजी,उस्तादों,विदूषियों,नृत्याचार्यों और चित्रकारों का किया कराया
सब को बता कर मैं भांड-मिरासियों के गौत्र का वंशज ही तो बन रहा हूँ
इन सब कला-साधकों का ज़र्रा भी बन न सकूँगा मैं अगले दस जन्मों में
तो फ़िर अकड़ता हूँ किस बात पर,किस औक़ात पर
गुणीजनों हो सके तो मुझे माफ़ करना.