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मल्हार के रंग में भीगे इन चार गीतो को रचा है संगीतकार रौशन साहब(बरसात की रात)पं.वसंत देसाई(गुड्डी) और राजकमल(चश्मेबद्दूर) ने.सुनते वक़्त संगीत के इन बेजोड़ कारीगरों के काम पर ख़ास तवज्जो दीजियेगा.

मौसीक़ी और प्रकृति का संबध अदभुत है.मानसून के शबाब पर आने पर ये अतिरिक्त रूप से मधुर हो उठता है..आप भी सुनिये और महसूस कीजिये कि दीगर दिनों जब आप ये गीत सुनते हैं तो क्या महसूस होता है और ऐन बरसात के मौसम में ये गीत क्या जादू करते हैं....
आपके शहर में भी ख़ूब आनंद दे इस साल की बारिश...दुआएँ मेरी ढेर सारी.
(चित्र गूगल सर्च के सौजन्स से)