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Thursday, January 1, 2009

नये साल के लिये कुछ तल्ख़ प्रस्ताव !


है तो यह अंग्रेज़ी रिवायत कि नये साल के लिये कुछ रिज़ॉल्यूशन्स पास किये जाएँ लेकिन सच कहूँ एक मौक़ा ज़रूर देती है यह कि आप गुज़रे के बारे में सोचें और तय करें कि आपको आगे क्या करना है. मैंने सोचा मन कट्ठा कर के कुछ तो तय कर लिया जाए ; देखें कितना निभ पाता है.


साझा प्रोजेक्ट्स में हाथ न डाला जाए; जो ख़ुद से हो सके वही करूँ.क्योंकि जीवन इतना ज़्यादा माँग करता है कि आप अपने खुद के लिये ही ठीक से कुछ नहीं कर पाते तो बाक़ी दोस्तों और परिचितों के लिये या उनके साथ कुछ कर पाएँ ये मुमकिन नहीं.

भावुकता एक बुरी बीमारी है. कोई भी काम आया; आपने हाँ कर दी.बाद में होता यह है कि किये वादों से पीछे हटना पड़ता है और आपके पास सिवा दु:ख और पश्चाताप के कुछ और नहीं बच पाता.

“ना” कहने और करने का शऊर पैदा करें.अंत में भी हाँ कहना पड़ता है . जो न कर सकें, उसे तुरंत नकार दें.बाद में ज़्यादा मुश्किलें पैदा होतीं हैं और मित्रों/परिजनों में ग़लत संदेश जाता है कि आप वादे के कच्चे हैं या अपनी बात को निभाना नहीं जानते.

सच कहने की आदत से पीछे हटा जाए.ये आदत लोगों को तकलीफ़ देती है और आप अप्रिय बनते हैं.लोगों को जो अच्छा लगता है वह कहने का जज़्बा पैदा करें.ज़माने ने कभी सच बोलने वालों को प्यार/इज़्ज़त नहीं दी.

ऐसे आयोजनों में जाने से बचें जो सिर्फ़ और सिर्फ़ औपचारिक होते जा रहे हैं.आप दुनिया को दिखाने के लिये शिरकत करना चाह रहे हैं.आपकी कोई निजी दिलचस्पी इन जमावडों में नहीं है लेकिन सिर्फ़ लोक-व्यवहार के लिये आप अपना समय,पैसा और उर्जा व्यर्थ कर रहे हैं.अपने आपको ख़र्च कर रहे हैं.

जीवन को अनुशासित बनाने की कोशिश करना है. खाने का समय,सोने का समय,दफ़्तर का समय यदि घड़ी के काँटे से चलना सीख गया तो बच जाओगे वरना ख़ुद भी तकलीफ़ पाओगे,परिवार को भी तकलीफ़ दोगे और मित्र / परिचित भी दु:खी होंगे.

जीवन की प्राथमिकताएँ तय करना है. कब कौन सा काम करना है. वह कितना विशिष्ट है और उससे मुझे/समाज/परिवार को क्या लाभ होने वाला है इसकी स्पष्टता करनी है. बस भिड़े हुए हैं इस तरह से नहीं करना है कोई काम.

देखिये लिख तो गया,कर पाता हूँ या नहीं अगले बरस के अंत में देखेंगे.सनद रहे प्रवचन देने,किसी को प्रेरित करने या अपने आपको विलक्षण साबित करने के लिये नहीं लिखा है यह सब. बस मन को एक एक्सप्रेशन चाहिये था सो लिख डाला. हाँ आख़िर में इतना ही कहना चाहूँगा कि पिछले बरस में मेरी वजह से किसी का दिल दुखा हो तो माफ़ करें.