
क्या आपने कभी बंदर पर गौर किया ? बंदर का बच्चा उसे कस कर पकड़ता है पर एक डाल से दूसरी डाल तक छलांग लगाते वक्त कई बार वो गिर जाता है। शायद इसीलिए कि बंदर ने उसे नहीं पकड़ा था। ठीक इसके विपरीत बिल्ली अपने बच्चे को मुंह से पकड़ कर एक स्थान से दूसरे स्थान तक कूद कर चली जाती है परन्तु बच्चा कभी नहीं गिरता। सीधी सी बात है। यहॉं बच्चे ने नहीं, मॉं ने बच्चे को थामा था।
जीवन के किसी भी रिश्ते की बुनियाद में, बंधन उतना महत्वपूर्ण नहीं है जितना कि रिश्ते की मज़बूती और परस्पर विश्वास। अतः आप भी अपने से प्यार करने वाले को मज़बूती से थामे रखिए, उससे ये अपेक्षा मत कीजिए कि वो आपको पकड़ेगा। यह छोटा सा संदेश है, पर ढेर सारी अच्छी भावनाओं से भरा हुआ।
(इन्दौर के जाने माने प्रबंध-गुरू एवं ख़ुशी बाँटने वाले नेक इंसान एस.नंद द्वारा संपादिन
परिपत्र स्वयं-उत्थान से साभार)
