Showing posts with label नीतिकथा.. Show all posts
Showing posts with label नीतिकथा.. Show all posts

Tuesday, June 10, 2008

बड़ी चीज़ है रिश्ते की मज़बूती और आपसी विश्वास

एक सुन्दर सी, छोटी सी लड़की अपने पापा के साथ जा रही थी कि नदी की एक पुलिया रास्ते में आ गई। पापा को पुलिया पार करते कुछ भय सा लगा तो उन्होंने बिटिया से कहा, "बेटी, मेरा हाथ कस के पकड़ लो ताकि तुम नदी में ना गिर जाओ।' छोटी बच्ची ने कहा, "नहीं पापा, आप मेरा हाथ थामिए।' पापा ने पूछा, "इससे क्या फर्क पड़ता है ?' बच्ची बोली, "इससे बहुत बड़ा फर्क पड़ता है। यदि मैं आपका हाथ पकड़ती हूँ और मुझे कुछ होता है तो पूरी संभावना है कि मैं आपका हाथ छोड़ दूँ पर यदि आप मुझे पकड़े रखते हैं तो चाहे जो हो जाए, आप मेरा हाथ कभी नहीं छोड़ेंगे।'
क्या आपने कभी बंदर पर गौर किया ? बंदर का बच्चा उसे कस कर पकड़ता है पर एक डाल से दूसरी डाल तक छलांग लगाते वक्त कई बार वो गिर जाता है। शायद इसीलिए कि बंदर ने उसे नहीं पकड़ा था। ठीक इसके विपरीत बिल्ली अपने बच्चे को मुंह से पकड़ कर एक स्थान से दूसरे स्थान तक कूद कर चली जाती है परन्तु बच्चा कभी नहीं गिरता। सीधी सी बात है। यहॉं बच्चे ने नहीं, मॉं ने बच्चे को थामा था।


जीवन के किसी भी रिश्ते की बुनियाद में, बंधन उतना महत्वपूर्ण नहीं है जितना कि रिश्ते की मज़बूती और परस्पर विश्वास। अतः आप भी अपने से प्यार करने वाले को मज़बूती से थामे रखिए, उससे ये अपेक्षा मत कीजिए कि वो आपको पकड़ेगा। यह छोटा सा संदेश है, पर ढेर सारी अच्छी भावनाओं से भरा हुआ।


(इन्दौर के जाने माने प्रबंध-गुरू एवं ख़ुशी बाँटने वाले नेक इंसान एस.नंद द्वारा संपादिन
परिपत्र स्वयं-उत्थान से साभार)

Thursday, May 29, 2008

प्यार के आगे नतमस्तक है क्रोध !


आज ही शाम को एक पत्रकार मित्र ने प्यारी से मेल प्रेषित की.
भाव बहुत ही मार्मिक था ..सोचा आपके साथ बाँटा जाए.

एक व्यक्ति अपनी कार धो रहा था. पास में उसका बेटा खेल
रहा था. अनायास बेटे को क्या सूझी कि उसने एक पत्थर उठा कर
कार के दरवाज़े पर कई चिरकट्टे (स्क्रैच) कर दिये. व्यक्ति ने
आव देखा न ताव गाड़ी के पास पड़े औज़ार से बच्चे की उंगलियाँ
मरोड़ दीं.टूटी उंगलियों से बहता ख़ून देखकर पिता घबराया और बच्चे को
नज़दीक ही स्थित अपने डॉक्टर मित्र की डिस्पैंसरी ले आया.

मरहम-पट्टी के दौरान मासूम बेटे ने बाप से पूछा
..डैड मेरी उंगलियाँ कब तक ठीक हो जाएँगी.
बच्चे का प्रश्न सुनकर को पिता को अपने कृत्य पर
क्रोध आया और वह तत्काल डिस्पैंसरी के बाहर
खड़ी कार के दरवाज़े के पास आकर पश्चातापस्वरूप
लातें मारने लगा. इसी दौरान उसकी नज़र कार के दरवाज़े
पर किये गए अपने बेटे के चिरकट्टों पर गई
बच्चे ने दरवाज़े पर पत्थर से उकेर रखा था.....
आय लव यू माय डैड !

क्या इसके बाद कुछ कहने को रह जाता है ?