जनसत्ता के चित्रों की बात ही निराली है. मेरे मालवा में भी इन दिनों कोहरा,मावठा (ठंड के दिनों में हुई बारिश) और कड़ाके की ठंड का आलम है और इन सब से जुड़े कुछ डिस्पैच अख़बारों में नमूदार भी हो रहे हैं . इसी बीच जनसत्ता में तीन चित्र कड़कड़ाती ठंड के हवाले से छ्पे और देखने में भी आए. आप भी नज़र डाले कि छायाकार ने कितनी सतर्कता,रागात्मकता और रचनात्मकता से इन चित्रों को खींचा है.
मुझे पूरा यक़ीन है कि ये चित्र आपको भी कंपकपा देंगे.
(रज़ाई और हाथ तापने वाले चित्र विशाल श्रीवास्तव के हैं)

